साथियों विश्वकर्मा प्राचीन मंदिर समिति सती घाट कनखल के चुनाव 11 अक्टूबर को विधिवत रूप से हाई कोर्ट के आदेशानुसार संपन्न हुए इस ऐतिहासिक मंदिर का यह ऐतिहासिक चुनाव था जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत पारदर्शी व्यवस्था के साथ संपन्न हुआ और इसी के साथ करीब 30 वर्षों से स्वयंभू अध्यक्ष चले आ रहे धर्मपाल सिंह को इस चुनाव में हार का मुंह देखना पड़ा इस चुनाव की अहम बात यह है कि आखिर यहां ऐसी स्थिति क्यों उत्पन्न हुई अधिकतर समितियों मैं ऐसा देखा गया है कि जो व्यक्ति पद और वहां की संपदा को अपने घर की बपौती समझने लगता है कहते हैं की लालच और इज्जत में बैर होता है और फिर वहां आक्रोश पनपने लगता है तब उसके ऐसे ही दुष्परिणाम देखने को मिलते हैं इस चुनाव में भले ही वर्तमान अध्यक्ष धनपाल सिंह ने धर्मपाल सिंह को को हरा दिया परंतु इस मंदिर में ऐसे ऐतिहासिक चुनाव कराने के पीछे कितना संघर्ष करना पड़ा कितनी समस्याओं से जूझना पड़ा वह शक्स भले अब इस चुनाव में कहीं दिखाई ना दिया हो परंतु उसकी भूमिका ठीक उसी प्रकार रहे जिस तरह मकान के नीचे दबी हुई ईट की होती है जो सारा भार वहन करती है परंतु दिखाई नहीं देते इस ईट का नाम पुष्प राज धीमान है जो पत्रकार के अलावा समाजसेवी एवं संघर्षशील एवं समाज को समर्पित एक जुझारू व्यक्ति हैं जिन्होंने करीब 8 साल इस मामले को लड़ा और 8 साल की इस उलटफेर दांवपेच के बाद जब धर्मपाल इस लड़ाई में हार गए तो उन्होंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया यह अलग बात है के उन्होंने साधुराम धीमान द्वारा नगर मजिस्ट्रेट की जांच आख्या एवं पूर्व चुनाव अधिकारियों द्वारा माननीय 73 सदस्य के बीच हुए चुनाव की अग्रिम कार्यवाही को ब्रेक लगवा दिया था परंतु इस ब्रेक लगवाने का फायदा होने के बजाय धर्मपाल को नुकसान ही हुआ मामला वर्ष 2010 से शुरू हुआ और आज तक चल रहा है भले ही चुनाव हो गए मगर स्थितियां यहां तक पहुंच गई के पुष्पराज धीमान के साथ जो साथी सहयोगी थे उन्हें भी डराने धमकाने और झूठे मुकदमों की परेशानियां झेलनी पड़ रही वर्ष 2011 में जब पुष्प राज धीमान ने धर्मपाल धीमान के कार्यकाल के संबंध की कुछ सूचनाएं फर्म सोसायटी एवं किड्स हरिद्वार से मांगी थी तब तमाम तरह की एनीवे ता एवं फर्जीवाड़ा सामने आया था फर्जीवाड़ा भी बड़ा गजब कि कोषाध्यक्ष चुना गया कार्यकारिणी में वर्षों तक रहा परंतु कोषाध्यक्ष के नाम ना तो कभी खाता खुला और ना ही कोषाध्यक्ष को उसके चुनाव का कोई पता बस फर्म सोसायटी की सूची में वर्षों तक नाम चलता रहा तो वहीं बैंक अकाउंट में 56 शो रुपए वर्षों तक रहे मगर बैलेंस शीट ₹85000 तक प्रतिवर्ष रही बैंक में मैं तो आया हुआ धन जमा किया गया और ना ही प्रस्ताव के मुताबिक निकाला गया मामला जब समाज के बीच और खुद के कार्यकारिणी को पता लगा तो उन्होंने वर्ष 2013 में अविश्वास प्रस्ताव लापर उन्हें हटा दिया मगर तानाशाही जिंदा रही चुनाव के बाद भले ही संस्था का अकाउंट पुष्पराज सत्यराज सुनील धीमान के नाम आ गया मगर पैसे का लेनदेन और मंदिर की चाबी धर्मपाल संभालते रहे मामला यहां तक भी नहीं रुका पुष्प राज धीमान ने चुनाव अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए तर्क दिया कि जब 2013 में पूर्व अध्यक्ष धर्मपाल का अविश्वास प्रस्ताव पास हो गया और इसकी सूचना फर्म सोसायटी को दी गई जिन्होंने अपनी जांच रिपोर्ट में इस बात का हवाला देते हुए प्रशासनिक रूप से चुनाव कराए जाने की बात की है और पूर्व दो चुनाव अधिकारियों ने नगर मजिस्ट्रेट के जांच आख्या के अनुसार 73 सदस्यों के बीच हे चुनाव कराए जाने का चुनाव कार्यक्रम एजेंडा जारी कर दिया था तो फिर वहीं अध्यक्ष 2014 में सदस्य बनाने का अधिकार कैसे रखता है इन सदस्यों को जबकि फर्म सोसायटी एवं चिट्स कार्यालय में धर्मपाल को पत्र लिखकर अनैतिक बताया था यहां तक के पूर्व कोषाध्यक्ष वर्तमान अध्यक्ष धनपाल धीमान ने पूर्व अध्यक्ष धर्मपाल धीमान के फर्जीवाड़े को लेकर एक पत्र एसएसपी महोदय को दिया था जिसमें उन्होंने खुद ही स्वीकार किया था की फर्म सोसायटी एवं चिट्स कार्यालय में उनका कोई रिकॉर्ड नहीं है और जो धन निकाला गया है वह है गलत है चुनाव अधिकारी पहले 4 दिन त तब तो इन्हें 73 सदस्यों को वेद मानते हुए चुनाव कराए जाने की बात करते रहे परंतु फिर मामला बाबा धर्मपाल द्वारा बनाए गए 117 सदस्य तक पहुंच गया और इन्हीं के बीच चुनाव हुए दरअसल अगर देखा जाए तो बाबा धर्मपाल को उनके अहंकार और उनके पोते द्वारा लोगों से की गई अभद्रता ने हराया जो धनपाल चुनाव में शामिल होने के लिए सदस्य या मंत्री तक सीमित था परंतु उनकी हठधर्मिता की वजह से वह अध्यक्ष पद एवं अन्य पदों के साथ मैदान में आया और जितने पदों पर पर्चे भरे विजय भी हुआ यह अलग बात है धनपाल के टीम द्वारा 17 के 17 पदों पर नामांकन नहीं भर पाए जिस कारण दूसरी पार्टी के कुछ सदस्य निर्विरोध ही बन गए परंतु बहुमत और मुख्य पदों पर धनपाल धीमान की टीम काबिल हुई शीघ्र ही चुनाव अधिकारी द्वारा शपथ ग्रहण कार्यक्रम कराया जाएगा यह तो वक्त बताएगा के धनपाल मंदिर की संपत्ति को बचाने के साथ कितना विकास कर पाएंगे बहरहाल इतना जरूर है इस पूरे मामले में भले ही धनपाल धीमान चुनाव जीत गए हो मगर असली जीत पुष्पराज धीमान के मानी जा रही है इस बात को विपक्षी भी अच्छी तरह ें समझते हैं पूरे मामले को देखा जाए तो पुष्पराज धीमान इस चुनाव में शामिल ना हो पाए मगर उन्होंने चुनाव में शामिल हुए बगैर ही अपने प्रतिद्वंदी को हराया और खुद बिना चुाव लड़े ही जीत गए
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